पनिकापारा जंगल में चीतल की दर्दनाक मौत, उठे बड़े सवाल

अंबिकापुर : के पनिकापारा जंगल में हाल ही में हुई चीतल की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोर की हल्की रोशनी के बीच जब ग्रामीण महुआ और सूखी लकड़ी बीनने पहुंचे, तो उन्होंने एक चीतल का क्षत-विक्षत शव देखा। सूखी पत्तियों पर पड़ा शव बुरी तरह से फटा हुआ था, पेट चीरा हुआ और आंतें बाहर निकली हुई थीं। आसपास खून फैला हुआ था, जिससे मिट्टी तक काली पड़ गई थी।

चीतल के पिछले पैरों पर गहरे नोंचने के निशान थे, जबकि गर्दन लगभग आधी कटी हुई थी। उसकी खुली आंखें इस बात का संकेत दे रही थीं कि उसने अपने अंतिम क्षणों में भयावह संघर्ष किया होगा। आशंका जताई जा रही है कि किसी हिंसक जानवर या कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला किया। गर्मी के कारण जंगल में पानी की कमी भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है, जिससे जानवर बस्तियों की ओर भटक रहे हैं।

वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक तौर पर कुत्तों के हमले की आशंका जताई। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पहले ही चीतल का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले भी संजय पार्क में 15 हिरणों की मौत हो चुकी है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

लगातार हो रही चीतल की मौत और अन्य वन्यजीवों की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जंगल में पानी और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल स्रोत विकसित नहीं किए गए और आवारा कुत्तों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। अब जरूरत है ठोस कार्रवाई की, ताकि जंगल में रहने वाले बेजुबान जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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