कोयला लेवी घोटाले में बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने देवेंद्र डडसेना की जमानत ठुकराई

बिलासपुर : में चर्चित कोयला लेवी और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी देवेंद्र डडसेना को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के आर्थिक अपराध सामान्य मामलों से अलग होते हैं और इनमें जमानत देने से पहले विशेष सतर्कता जरूरी है।

कई धाराओं में दर्ज है मामला, जांच एजेंसियां सक्रिय

यह पूरा प्रकरण एंटी करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज केस से जुड़ा है। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के साथ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह सामने आया कि राज्य में कोयला परिवहन के नाम पर अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क चल रहा था।

540 करोड़ की अवैध वसूली का खुलासा

जांच में सामने आया कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट ने भारी पैमाने पर वसूली की। प्रति टन 25 रुपये के हिसाब से लगभग 540 करोड़ रुपये की अवैध रकम इकट्ठा की गई। इस नेटवर्क में कई अधिकारी, कारोबारी और अन्य प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता बताई जा रही है।

52 करोड़ के लेनदेन के सबूत, भूमिका अहम बताई गई

कोर्ट में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के आधार पर देवेंद्र डडसेना को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना गया। आरोप है कि वह वसूली की रकम के संग्रह और वितरण में सक्रिय था। जब्त दस्तावेजों और गवाहों के बयान में करीब 52 करोड़ रुपये के लेनदेन का जिक्र भी सामने आया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस रकम का उपयोग विभिन्न राजनीतिक और अन्य खर्चों में किया गया।

बचाव पक्ष ने कहा झूठा फंसाया गया

आरोपी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उसे गलत तरीके से मामले में शामिल किया गया है। उसके खिलाफ कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, बल्कि केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं।

राज्य सरकार का पक्ष, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका

वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है और आरोपी की भूमिका इसमें सक्रिय रही है। साथ ही यह भी आशंका जताई गई कि यदि जमानत दी गई तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है, क्योंकि जांच अभी जारी है।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश, जमानत देना न्याय के हित में नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी की भूमिका गंभीर और उपलब्ध साक्ष्यों से समर्थित प्रतीत होती है। अदालत ने कहा कि इतने बड़े आर्थिक अपराध में जमानत देना न्याय व्यवस्था के हित में नहीं होगा, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

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