महासमुंद ट्रिपल मर्डर : पिता-पुत्र की उम्रकैद बरकरार, हाई कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा- ऐसे जघन्य अपराध में नरमी दिखाना इंसाफ के खिलाफ

महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में हाई कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। जमीन विवाद को लेकर गायकवाड़ परिवार के तीन सदस्यों की हत्या के मामले में आरोपी पिता और पुत्र की अपील को खारिज कर दिया गया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पूरी तरह सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा।

डिविजन बेंच ने कहा, अपराध बेहद जघन्य, नरमी की कोई गुंजाइश नहीं
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस Ramesh Sinha की डिविजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर और जघन्य प्रकृति का है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की नरमी बरतना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

घर में घुसकर गला रेतकर की थी हत्या, पूरे इलाके में फैली थी दहशत
मामले में आरोपी पिता परसराम और उसके बेटे पर आरोप था कि उन्होंने घर में घुसकर गायकवाड़ परिवार के तीन लोगों की बेरहमी से हत्या की थी। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था और लंबे समय तक भय का माहौल बना रहा।

निचली अदालत के फैसले पर मुहर, हाई कोर्ट को नहीं दिखी कोई त्रुटि
आरोपियों ने सजा में राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह उचित है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।

कड़ा संदेश, जघन्य अपराधों में सख्ती ही न्याय का आधार
इस फैसले के जरिए हाई कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में सख्ती जरूरी है और दोषियों को किसी भी हाल में राहत नहीं दी जाएगी। यह निर्णय कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाता है।

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