पुलिस पर बड़ा एक्शन: वसूली, धमकी और सबूत मिटाने के गंभीर आरोपों ने मचाई हलचल

मध्य प्रदेश : एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्वालियर से सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है, जहां एक पूर्व एसपी स्तर के अधिकारी सहित चार पुलिसकर्मियों पर डकैती और जबरन वसूली का केस दर्ज हुआ है। यह कार्रवाई जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया के आदेश के बाद की गई है।

30 लाख की वसूली और CCTV सबूत गायब करने का आरोप

पूरा मामला थाटीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार पुलिस ने एक धोखाधड़ी के मामले को सुलझाने के नाम पर करीब 30 लाख रुपये की वसूली की। इतना ही नहीं, थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को भी कथित तौर पर डिलीट कर दिया गया ताकि सबूत खत्म किए जा सकें।

पीड़ित का आरोप: समझौते के नाम पर दबाव, एनकाउंटर की धमकी

शिकायतकर्ता अनूप राणा ने बताया कि 24 अप्रैल 2023 को उसे थाने बुलाया गया था। पहले ही 5 लाख रुपये लिए जा चुके थे और इसके बाद 25 लाख रुपये और वसूले गए। आरोप है कि थाने में उसे और उसके परिवार को डराया गया, यहां तक कि एनकाउंटर में मारने की धमकी दी गई। जब अतिरिक्त रकम देने से इनकार किया गया, तो उसे जेल भेज दिया गया।

आरोपियों में बड़े अधिकारी शामिल, मिलीभगत के भी आरोप

इस मामले में तत्कालीन एसपी राजेश सिंह चंदेल, थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पीड़ित का आरोप है कि उसने एसपी स्तर तक शिकायत की, लेकिन थाना और वरिष्ठ अधिकारी की कथित मिलीभगत के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई।

कोर्ट की सख्ती: फुटेज गायब मिलने पर खुली परतें

जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीसीटीवी फुटेज मंगवाए, लेकिन घटना वाले दिन की रिकॉर्डिंग नहीं मिली। इसके बाद तकनीकी जांच कराई गई, जिसमें फुटेज डिलीट किए जाने की बात सामने आई।

11 मई को कोर्ट का बड़ा आदेश, केस दर्ज करने के निर्देश

पूरा घटनाक्रम सामने आने के बाद 11 मई को अदालत ने परिवाद स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और अब पूरे मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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