नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। विभागों के आवंटन को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने इस फेरबदल के जरिए राजनीतिक, सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कोशिश की है।
विभागों के बंटवारे से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली पहुंचकर पार्टी आलाकमान से मुलाकात की थी। इसके बाद मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस कदम को आने वाले चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
भूपेंद्र चौधरी को मिला बड़ा विभाग
पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। यह विभाग रोजगार और छोटे उद्योगों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार उन्हें औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के बड़े चेहरे के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।
वहीं समाजवादी पार्टी से अलग होकर बीजेपी के करीब आए मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। इसे पूर्वांचल और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति माना जा रहा है।
इन मंत्रियों को भी मिली नई जिम्मेदारी
अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सोमेंद्र तोमर को सैनिक कल्याण, राजनीतिक पेंशन और प्रांतीय रक्षक दल का प्रभार मिला है।
कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा कैलाश राजपूत को ऊर्जा स्रोत विभाग और सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग में जिम्मेदारी दी गई है।
हंसराज विश्वकर्मा को MSME विभाग में राज्यमंत्री बनाया गया है।
10 मई को हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
गौरतलब है कि 10 मई को योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था। इस विस्तार में छह नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया, जबकि दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन मिला था।
अब विभागों के बंटवारे के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने दलित, पिछड़ा, ब्राह्मण, जाट और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
PDA फार्मूले का जवाब देने की तैयारी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस फेरबदल के जरिए विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फार्मूले का जवाब देने की तैयारी कर रही है।
सरकार ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया है जिनका अलग-अलग क्षेत्रों और जातीय समूहों में प्रभाव माना जाता है। इससे पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश भी साफ नजर आ रही है।
योगी सरकार का क्या है बड़ा संदेश?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस नए विभागीय बंटवारे के जरिए योगी सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आने वाले समय में विकास, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक मजबूती तीनों पर बराबर फोकस रहेगा।
खासकर भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय जैसे नेताओं को अहम विभाग देकर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि 2027 के चुनाव को लेकर उसकी तैयारी अभी से तेज हो चुकी है।








