वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान हर हाल में अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और दोनों देशों के बीच चल रहा तनाव अब जल्द खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।इतना ही नहीं, ट्रंप ने पूरी दुनिया को राहत देने वाला संकेत देते हुए कहा कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। उनका मानना है कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई काफी ज्यादा है, इसलिए अब कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
ट्रंप बोले- अब धड़ाम से गिरेंगे तेल के दाम
मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान अब डील करने के लिए बेहद उत्सुक है और हालात तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया जल्द देखेगी कि तेल की कीमतें किस तरह तेजी से नीचे आती हैं।ट्रंप के इस बयान को वैश्विक बाजार और कूटनीतिक हलकों में बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका और Iran के बीच पर्दे के पीछे बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता पर
पिछले कई महीनों से पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच समझौता होता है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।विशेषज्ञ मान रहे हैं कि तनाव कम होने की स्थिति में तेल सप्लाई सामान्य होगी और इससे पेट्रोल-डीजल समेत कई जरूरी चीजों की कीमतों पर राहत मिल सकती है।
अमेरिकी सीनेट ने ट्रंप की ताकत पर लगाया ब्रेक
ट्रंप के बयान से पहले अमेरिकी संसद यानी United States Senate में एक अहम प्रस्ताव पास किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीनेट ने 50-47 वोट से ऐसा प्रस्ताव मंजूर किया है, जो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करता है।यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक सीनेटर Tim Kaine द्वारा लाया गया था। प्रस्ताव के अनुसार जब तक संसद औपचारिक रूप से युद्ध की अनुमति नहीं देती, तब तक राष्ट्रपति अपनी मर्जी से ईरान पर हमला नहीं कर सकते।
रिपब्लिकन सांसदों ने भी पार्टी लाइन तोड़ी
इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि ट्रंप की अपनी पार्टी रिपब्लिकन के चार सांसदों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। इनमें Susan Collins, Lisa Murkowski, Rand Paul और Bill Cassidy शामिल हैं।बताया जा रहा है कि सात बार असफल रहने के बाद आठवें प्रयास में यह प्रस्ताव पास हो सका, जिसने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।








