मध्य प्रदेश : कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और दुखद खबर सामने आई है, जहां एक बाघ शावक की मौत हो गई है। कोर एरिया के सरही इलाके में शावक का शव मिलने से वन विभाग में हलचल मच गई है। मृत शावक की उम्र लगभग एक से डेढ़ वर्ष बताई जा रही है।
कुछ दिन पहले ही भाई की मौत, एक ही बाघिन के दो शावक हुए शिकार
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस बाघिन का यह शावक था, उसी के एक अन्य शावक की मौत मात्र तीन दिन पहले हो चुकी है। कुल चार शावकों में से अब तक दो की मौत हो चुकी है, जबकि दो शावक अभी जीवित बताए जा रहे हैं। लगातार हो रही इन मौतों ने वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, कारणों पर सस्पेंस बरकरार
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शावक की मौत के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। शुरुआती आशंका यह भी जताई जा रही है कि शावक को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाया, जिससे उसकी मौत हो सकती है, लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएंगे।
एक महीने में तीन शावकों की मौत, आंकड़े कर रहे परेशान
कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले एक महीने के भीतर यह तीसरी बाघ शावक की मौत है। लगातार हो रही घटनाएं संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं और निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है।
टाइगर स्टेट में बढ़ती मौतें, वन्यजीव संरक्षण पर दबाव
मध्य प्रदेश को देश में टाइगर स्टेट के रूप में जाना जाता है, जहां सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। इसके बावजूद इस वर्ष अब तक 22 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जिनमें शावक भी शामिल हैं। राज्य में 9 टाइगर रिजर्व होने के बावजूद यह आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।
कान्हा में पिछले 8 महीने का रिकॉर्ड और भी गंभीर
केवल कान्हा टाइगर रिजर्व की बात करें तो पिछले 8 महीनों में यहां 9 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब जरूरी हो गए हैं।








