कोलकाता। Mamata Banerjee ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के अंदरूनी नेताओं पर तोड़फोड़ का गंभीर आरोप लगाया है। 15 साल बाद सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस में अब सियासी हलचल तेज हो गई है।
Mamata Banerjee ने कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर 71 नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की और साफ कहा कि पार्टी या शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में ममता ने दावा किया कि पार्टी के कुछ लोगों ने भीतर से नुकसान पहुंचाया। इसी मामले की जांच के लिए डेरेक ओ’ब्रायन, फिरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और असीमा पात्रा को शामिल करते हुए अनुशासन समिति बनाई गई है। साथ ही हिंसा प्रभावित इलाकों के लिए फैक्ट-फाइंडिंग टीमें भी गठित की गई हैं।
चुनाव नतीजों पर ममता ने EVM और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा है। उन्होंने विधायकों से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर आने की अपील भी की।
TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव में धांधली हुई और पार्टी के पास इसे अदालत में चुनौती देने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। उन्होंने जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जाने की बात भी कही।
इस बीच पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा भाजपा की जीत को जनादेश बताए जाने के बाद TMC ने बयान जारी कर कहा कि ये व्यक्तिगत राय हैं। पार्टी अब अंदरूनी बयानबाजी पर भी लगाम लगाने की कोशिश में जुटी है।
बैठक में Abhishek Banerjee और सुब्रत बक्शी भी मौजूद रहे। वहीं ममता ने विपक्ष पर राज्यभर में पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और हिंसा फैलाने का आरोप लगाया।







