फ्री राशन सिस्टम में बड़ा बदलाव…अब चेहरे से होगी पहचान, नियम बदलने की तैयारी तेज

भोपाल | मध्य प्रदेश में करोड़ों लोगों को मिलने वाले फ्री राशन सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के आधार पर मिलने वाला राशन जल्द ही फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए दिया जा सकता है। सरकार इस नई व्यवस्था को साल 2026 के अंत तक लागू करने की तैयारी में है।
आधी आबादी को मिल रहा लाभ, आंकड़े चौंकाने वाले
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 5.38 करोड़ लोग मुफ्त राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं, जबकि राज्य की कुल आबादी लगभग 9 करोड़ के आसपास है। यानी आधे से ज्यादा लोग इस योजना पर निर्भर हैं। मार्च महीने में ही 2.72 लाख मीट्रिक टन राशन करीब 1.24 करोड़ परिवारों तक पहुंचाया गया।
फेस रिकग्निशन से मिलेगा राशन, दिसंबर तक लागू करने की योजना
राज्य सरकार के मंत्री Govind Singh ने जानकारी दी कि दिसंबर 2026 तक पूरे प्रदेश में फेस रिकग्निशन आधारित सिस्टम लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तकनीक में हितग्राहियों की पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए उनके चेहरे के पैटर्न से की जाएगी।
पोर्टेबिलिटी और इंटर स्टेट सिस्टम से जुड़े लाखों परिवार
मंत्री के अनुसार:

करीब 36 हजार से ज्यादा परिवार दूसरे राज्यों से राशन ले रहे हैं

7 हजार से अधिक बाहरी राज्य के परिवार मध्य प्रदेश में लाभ उठा रहे हैं

18.55 लाख परिवार अंतर जिला पोर्टेबिलिटी के तहत राशन प्राप्त कर रहे हैं

44 हजार से ज्यादा मामलों में परिवार के सदस्य को नॉमिनी बनाकर राशन दिया जा रहा है

यह आंकड़े दिखाते हैं कि राशन वितरण प्रणाली अब काफी व्यापक और तकनीक आधारित हो चुकी है।
बायोमेट्रिक से आगे बढ़ेगा सिस्टम, पारदर्शिता पर फोकस
अब तक अंगूठे के निशान यानी बायोमेट्रिक सिस्टम से पहचान की जाती थी, लेकिन कई बार तकनीकी दिक्कतें सामने आती थीं। नए फेस रिकग्निशन सिस्टम से इन समस्याओं को कम करने और वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
छूटे हितग्राहियों के लिए राहत, तय समय तक मिलेगा राशन
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों को तय समय पर राशन नहीं मिल पाया है, उन्हें निर्धारित तारीख तक वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे।
तकनीक के साथ बदलेगा राशन सिस्टम का भविष्य
फेस रिकग्निशन आधारित यह नई व्यवस्था न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगाएगी, बल्कि वितरण प्रक्रिया को तेज और आसान भी बनाएगी। आने वाले समय में यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और अधिक विश्वसनीय बना सकता है।

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